वीडियो ने किया संसद में विपक्ष के दंगों का पर्दाफाश

वीडियो ने किया संसद में विपक्ष के दंगों का पर्दाफाश

वीडियो ने किया संसद में विपक्ष के दंगों का पर्दाफाश, महिला सांसदों ने मार्शल के साथ किया बदसलूकी

विपक्ष में इतनी ईमानदारी होनी चाहिए कि वह कह सके कि उसने संसद का मानसून सत्र जारी नहीं रहने दिया। अगर वह यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि उनके प्रयासों के बावजूद संसद नहीं चली, तो वह हंसी का पात्र बन जाएंगे।

नई दिल्ली: जो विपक्ष ने संसद को अपनी कट्टरता से नहीं चलने दिया, वह अब रो रहा है कि सरकार, अध्यक्ष, ने सदन को क्यों नहीं चलने दिया? यह न केवल अजीब है, बल्कि विचित्र भी है। विपक्ष इस तरह के आरोप भी लगा रहा है कि खुद को पीड़ित बताने के लिए उसके नेताओं के साथ उच्च सदन में दुर्व्यवहार किया गया।

दुर्भाग्य से विपक्ष के लिए इस कथित दुर्व्यवहार का जो वीडियो सामने आया वह कुछ और ही कहानी बयां करता है. मार्शल और सांसदों के बीच हाथापाई होती दिख रही है. इसमें कुछ महिला सांसदों को मार्शल खींचते हुए भी दिखाया गया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष ने सफाई दी कि पूरी घटना को दिखाया जाना चाहिए.

गंदी हरकत का भी विपक्ष बचाव कर रहा

पता नहीं पूरा घटनाक्रम किसी कैमरे में कैद हुआ है या नहीं, लेकिन यह तो सबने देखा है कि कुछ विपक्षी सांसद राज्यसभा सभापति के आसन के समक्ष मेज पर चढ़े हुए थे और बाकी तालियां बजा रहे थे। विडंबना यह है कि ऐसी ओछी-अमर्यादित हरकत का भी विपक्ष बचाव कर रहा है। वास्तव में इसी रवैये के कारण उसके आरोपों पर यकीन करना कठिन हो रहा है। क्या ये वही विपक्ष नहीं, जिसने संसद में मंत्री के हाथ से कागज छीनकर फाड़े, आसन के समक्ष जाकर नारेबाजी की और तख्तियां लहराईं?

विपक्ष अपनी सारी हरकतों को जायज ठहरा रहा है.

जो विपक्ष संसदीय नियम-कायदों का नारा लगा रहा है, वह वही है, जिसने पहले ही दिन स्पष्ट कर दिया था कि संसद को चलने नहीं दिया जाना चाहिए और इसीलिए उसने प्रधानमंत्री को एक मौका भी नहीं दिया। अपने नए मंत्रियों को सदन से हटा दें। क्या आप परिचित हो सकते हैं? ऐसा कभी नहीं हुआ है, लेकिन विपक्ष यह कह रहा है कि उसकी सभी हरकतें जायज हैं और सारी गलती सत्ताधारी पार्टी की है। विपक्ष ने संसद सत्र के विफल होने और उसके समय से पहले खत्म होने के विरोध में रोड मार्च भी निकाला, लेकिन इसे चोरी और पायरेसी के अलावा कुछ भी कहना मुश्किल है |

…तो विपक्ष बन जाएगा हंसी का पात्र

विपक्ष में इतनी ईमानदारी होनी चाहिए कि वह कह सके कि उसने संसद का मानसून सत्र जारी नहीं रहने दिया। अगर वह यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि उनके प्रयासों के बावजूद संसद नहीं चली, तो वह हंसी का पात्र बन जाएंगे। विपक्ष को इस बात का आभास हो जाए तो बेहतर है कि उसने सरकार को घेरने की बारी में खुद को कटघरे में खड़ा करने का काम किया है. बेशक, संसद चलाते समय, सत्ताधारी दल को विपक्ष की असहमति का सम्मान करना पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि वह अपनी संसदीय जिम्मेदारियों को सौंपकर उसके आदेशों का पालन करना शुरू कर देता है। मनमानी चाहे किसी की हो, नहीं करनी चाहिए।

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By-jagran.com

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