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Language in hindi

Language in hindi: हेलो साथियों हम रोजाना आप सभी के लिए कोई ना कोई टॉपिक की जानकारी लाते रहते हैं उसके चलते  ही आज हम आपको जानकारी देने वाले हैं Language in hindi जी साथियों तो आज हम Language in hindi के बारे में जानेंगे तो चलिए जानते हैं क्या होती है Language in hindi और यह  आपकी लाइफ में कितनी महत्वपूर्ण है |

Language in hindi

भाषा शब्द संस्कृत मूल ‘भाषा’ से बना है। इस धातु का अर्थ है वाणी की अभिव्यक्ति।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज के अन्य मनुष्यों के सामने अपने विचार व्यक्त करता है और उनके विचारों को सुनता है और उन विचारों को समझने की कोशिश करता है। इसके लिए उसे शब्दों का सहारा लेना पड़ता है, उसे शब्दों का निर्माण करना पड़ता है। दुनिया में कई तरह की भाषाएं बोली जाती हैं।

क्या है ? भाषा की परिभाषा

Language in hindi: वह माध्यम जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपने मन की बात, अनुभव और भावनाओं को दूसरे व्यक्ति के सामने व्यक्त कर सकता है। हम अपनी भावनाओं को आंख, कान, नाक, पैर और शारीरिक क्रियाओं के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं। वस्तु प्रदर्शन, चित्र प्रदर्शन और विभिन्न क्रियाओं द्वारा विभिन्न संकेतों के माध्यम से भावनाओं को व्यापक अर्थों में व्यक्त करने के इन सभी साधनों को भाषा कहा जाता है।

वर्तमान युग में, अधिकांश विद्वान भाषा का नाम केवल उन ध्वनि संकेतों को देते हैं जो विचारों और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इसलिए, शास्त्रीय धर्म में, विचार की अभिव्यक्ति के लिए समाज द्वारा स्वीकार किए गए ध्वनि संकेतों को भाषा कहा जाता है।

Distinction of language in hindi : भाषा के कितने भेद होते हैं

भाषा के मुख्य तीन भेद होते हैं जो कुछ इस प्रकार है –

  1. मौखिक भाषा
  2.  कथित भाषा
  3.  सांकेतिक भाषा

1.  मौखिक भाषा

Language in hindi: भाषा का वह रूप जो मुख से बोला जाता है और कानों से सुना जाता है, मौखिक भाषा कहलाता है। इसे तथाकथित भाषा भी कहते हैं।

Example – जब दो व्यक्ति आपस में बात करते हैं तो विचारों का आदान-प्रदान मौखिक रूप से होता है। या जब आप किसी से मोबाइल पर बात करते हैं तो उसमें बोली जाने वाली भाषा का प्रयोग होता है।

2. Language in hindi में कथित भाषा

Language in hindi: भाषा का वह रूप जो हाथों से लिखा जाता है और आँखों से देखा और पढ़ा जाता है, लिखित भाषा कहलाती है। यही भाषा का वास्तविक स्वरूप है।

लिखित भाषा के माध्यम से ज्ञान का भंडारण किया जाता है, ताकि किसी भी जानकारी को लिखित रूप देकर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाया जा सके।
Example – जब शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय बच्चों को लिखकर अपने विचार समझाता है तो वह लिखित भाषा का प्रयोग करता है या यदि आप इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं तो यहाँ केवल लिखित भाषा का प्रयोग किया गया है।

3. सांकेतिक भाषा

Language in hindi: जिस भाषा में किसी अन्य व्यक्ति को केवल ‘संकेतों या संकेतों’ का उपयोग करके समझाया जाता है, उसे संकेत भाषा कहा जाता है।

इस भाषा में ध्वनि अंगों के प्रयोग के बिना शरीर के विभिन्न अंगों (हाथ, चेहरा, गर्दन आदि) के माध्यम से अपने विचारों को विशेष संकेतों के रूप में दूसरों को समझाया जाता है।

Example – प्राचीन काल में मनुष्य अपनी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने के लिए संकेतों का उपयोग करता था। उदाहरण के लिए, हाथ के इशारों से आने या जाने का संकेत देना।

हम आज भी चौराहे पर खड़े सिपाही या रेल गार्ड को देख सकते हैं, जो अपने निर्धारित संकेतों से चलने या रुकने का निर्देश देते हैं, लेकिन इससे हमारी समझ पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होती है। इसलिए भाषा के इस रूप को व्याकरण में मान्यता नहीं है।

भाषा के भिन्न-भिन्न रूप कौन-कौन से हैं

Language in hindi: जीवन के विभिन्न व्यवहारों के अनुसार भाषाई उद्देश्यों की खोज हमारे समय की अनिवार्यता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई स्तरों पर और कई संदर्भों में भाषाओं का संचार कार्य पूरी तरह से सापेक्ष हो गया है। अनुप्रयोग और उद्देश्य के बिना एक भाषा अब एक भाषा नहीं है। भाषा को न केवल उस जीवन शक्ति से पहचाना जाता है |

जिसके साथ उसमें कविताओं और कहानियों का निर्माण किया जाता है, बल्कि भाषा की अधिक संप्रेषणीयता का एक अनिवार्य उपोत्पाद सामाजिक संदर्भों और नए उद्देश्यों को साकार करने की इसकी क्षमता है। यहाँ विश्व की भाषाओं में, यह प्रयोज्यता धीरे-धीरे विकसित हुई है और आजीविका का माध्यम बनने की विशेषताओं के साथ भाषा का एक नया आयाम उभरा है: वर्ग भाषा, तकनीकी भाषा, साहित्यिक भाषा, राजभाषा, राष्ट्रीय भाषा, संपर्क भाषा , बोलचाल की भाषा। भाषा, मानक भाषा आदि।

  • बोलचाल की भाषा
  • मानक भाषा
  • सम्पर्क भाषा
  • राजभाषा
  • राष्ट्रभाषा

भारत के विभिन्न राज्यों में बोले जाने वाली भाषाएं कौन कौन-सी  हैं

  • जम्मू एवं कश्मीर में – कश्मीरी डोगरी और हिन्दी है।
  • हिमाचल प्रदेश में – हिन्दी पंजाबी और नेपाली है।
  • हरियाणा में – हिन्दी, पंजाबी और उर्दू है।
  • पंजाब में – पंजाबी व हिन्दी है।
  • उत्तराखण्ड में – हिन्दी उर्दू, पंजाबी और नेपाली है।
  • दिल्ली में – हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और बंगाली है।
  • उत्तर प्रदेश में – हिन्दी व उर्दू है।
  • राजस्थान में – हिन्दी, पंजाबी और उर्दू है।
  • मध्य प्रदेश में – हिन्दी,मराठी और उर्दू है।
  • पश्चिम बंगाल – बंगाली हिन्दी, संताली, उर्दू, नेपाली है।
  • छत्तीसगढ़ में – छत्तीसगढ़ी व हिन्दी है।
  • बिहार में – हिन्दी, मैथिली और उर्दू हैं।
  • झारखण्ड में – हिन्दी, संताली, बंगाली और उर्दू है।
  • सिक्किम में – नेपाली, हिन्दी, बंगाली है।
  • अरुणाचल प्रदेश में –  बंगाली, नेपाली, हिन्दी और असमिया है।
  • नागालैण्ड में – बंगाली हिन्दी और नेपाली है।
  • मिजोरम में – बंगाली हिन्दी और नेपाली है।
  • असम में – असमिया बंगाली, हिन्दी, बोडो और नेपाली है।
  • त्रिपुरा में – बंगाली व हिन्दी है।
  • मेघालय में –  बंगाली, हिन्दी और नेपाली है।
  • मणिपुर में – मणिपुरी, नेपाली, हिन्दी और बंगाली है।
  • ओडिशा में –  ओड़िया हिन्दी, तेलुगु और संताली है।
  • महाराष्ट्र में – मराठी, हिन्दी, उर्दू और गुजराती है।
  • गुजरात में – गुजराती, हिन्दी, सिन्धी, मराठी और उर्दू है।
  • कर्नाटक में – कन्नड़ उर्दू, तेलुगू, मराठी और तमिल है।
  • दमन और दीव में – गुजराती हिन्दी और मराठी है।
  • दादरा और नगर हवेली में – गुजराती, हिन्दी, कोंकणी और मराठी है।
  • गोवा में – कोंकणी मराठी, हिन्दी और कन्नड़ है।
  • आन्ध्र प्रदेश में – तेलुगु उर्दू, हिन्दी और तमिल है।
  • केरल में – मलयालम है।
  • लक्षद्वीप में – मलयालम है।
  • तमिलनाडु में – तमिल तेलुगू, कन्नड़ और उर्दू‌ है।
  • पुडुचेरी में – तमिल तेलुगू, कन्नड़ और उर्दू है।
  • अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह में – बंगाली, हिन्दी, तमिल, तेलुगू और मलयालम है।

भाषा की विशेषताएं क्या क्या है 

भाषा की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

  1. भाषा प्रतीकात्मक है।
  2. भाषा ध्वन्यात्मक है।
  3. भाषा का संबंध मनुष्य से है।
  4. भाषा की एक क्षेत्रीय सीमा होती है।
  5. भाषा परिवर्तनशील है।
  6. भाषा सरलता और परिपक्वता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।
  7. भाषा का विकास और पतन सांस्कृतिक विकास और समाज के पतन से भी जुड़ा है।

language ka meaning kya hai

लैंग्वेज का अर्थ बताया जाए तो होता है बोलने की शैली ,हमारे जो बोलने का तरीका होता है उसे ही हम एक प्रकार से लैंग्वेज कहते हैं जोकि डिफरेंट डिफरेंट राज्य प्रदेश इत्यादि में अलग अलग होती है |

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